भिखारीनामा

तनिक न आवे गावे-बजावे, काहें दो लागल लोग के भावे! भिखारी ठाकुर जब भारत के राष्ट्रपति ने इस साल के पद्म पुरस्कारों को घोषणा कि तो उसमे बहुत बड़े बड़े नाम थे मसलन,जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो अबे से लेकर पुराने राजनीतिज्ञ रामविलास पासवान तक, लेकिन उसमे एक नाम सहसा आश्चर्यचकित करने वाला था ,वहContinue reading “भिखारीनामा”

विश्व के बदलते अयाम

19 वीं सदी के नवीन भारत ,विश्वपटल में छाप छोड़ता नया भारत,दुनिया के नई शक्तिओ का अगुआ भारत,एशिया का नया शेर भारत। परन्तु क्या हम कुछ ज्यादा ही लालची  हो रहे है? भारत का विश्व के अन्य राष्ट्रो के साथ रिश्तों से इनपे क्या प्रभाव पड़ता है। चलिए एक आकलन करते है। शुरुआत करते हैContinue reading “विश्व के बदलते अयाम”

नया सवेरा

जीवन के प्याले में मैंने,अश्रु का विषपान किया हैं। बरसते नयनों में भी मैंने , सुबक सुबक कर गान किया है।। रिमझिम मौसम में भी मैंने सुना सा संसार देखा है। चढ़ रही अंधकार में मैंने, उग रहा भिनसार देखा है।। टूट हुए सितारों का मैंने अपमान किया है। इच्छा ना बताकर उन पर एहसानContinue reading “नया सवेरा”

भारत मतलब कौन? 🇮🇳

“मानचित्र में जो मिलता है, नही देश भारत है। भू पर नहीं, मनों में ही बसा,कहीं शेष भारत है।” -दिनकर जन गण मन भारत भाग्य विधाता। पर ये भारत कौन है ? क्या सिर्फ एक देश या एक राष्ट्र या एक बृहद परिवार या फिर लोगो के अंदर बसे भारतीयता का भौतिक रूप। हमारे पूर्वजोंContinue reading “भारत मतलब कौन? 🇮🇳”

वृद्धाश्रम बनते गांव (भाग 1)

“कुंकुम? लेपूं किसे? सुनाऊँ किसको कोमल गान?तड़प रहा आँखों के आगे भूखा हिन्दुस्तान।” श्री दिनकरजी कि ये कविता आज भी हिंदुस्तान कि दशा और दुर्दशा को भलीभांति हम सभी के मानस पटल पर उकेर देती है, आंखो के सामने हमारे देश की वो तस्वीर ला खड़ा करती है जिसे शायाद नए युग के भारत नेContinue reading “वृद्धाश्रम बनते गांव (भाग 1)”

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